देवास। उच्च शिक्षा विभाग भोपाल के निर्देशानुसार भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की त्रैमासिक गतिविधियों के अंतर्गत 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉॅ. आर.एस.अनारे ने की। ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. ममता झाला, डॉ. आर.के.मराठा, डॉ. सीमा सोनी, डॉ. जया गुरनानी, नीरज जैन (ग्रंथालय प्रभारी) की मंच पर गरिमामयी उपस्थिति रही। मंचासीन अतिथियों द्वारा विद्या की देवी मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण कर कार्यक्रम का आरंभ किया गया। स्नेहा आठिया एवं राकेश काजले ने मधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। स्वागत भाषण एवं कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. ममता झाला ने सदन में रखी। शिक्षा के क्षेत्र में मातृभाषा की भूमिका विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में स्नेहा आठिया प्रथम, प्रमोद करवरिया द्वितीय एवं आयुष देवड़ा तृतीय स्थान पर रहे।
तकनीकी युग में मातृभाषा का अस्तित्व एवं चुनौतियों विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम कनक राठौर, द्वितीय राजा पांचाल, तृतीय शानू नागर, मातृभाषा और राष्ट्रीय परिदृश्य विषय पर आधारित प्रश्नमंच प्रतियोगिता में प्रथम कनक राठौर एवं साक्षी परिहार, द्वितीय शानू नागर, तृतीय प्रमोद करवरिया एवं रितेश गुदेन रहे।
भारतीय भाषाएं एवं भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में डॉॅ. रेखा कौशल ने भाषा के विकास क्रम के साथ ही भारतीय ज्ञान परम्परा को संपोषित करने वाली भारतीय भाषाओं की भूमिका को उदाहरण द्वारा समझाया गया। डॉ. सीमा सोनी ने कहा कि मातृभाषा हमारी धरोहर है औैर इसे हमें गर्व के साथ स्वीकार करना चाहिये। डॉ. जया गुरनानी ने राजभाषा राष्ट्र भाषा के साथ ही मातृभाषा के महत्व को स्पष्ट किया। डॉ. लता धूपकरिया, डॉ. जरीना लोहावाला, डॉ. कैलाश यादव, डॉ. हेमंत मंडलोई, डॉ. ममता लावरे, डॉ. रजत राठौर, डॉ. ललिता गौरे, डॉ. श्याम सुंदर चौधरी, डॉ. खुशबू बेग, प्रोे. निहारिका व्यास एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. माया ठाकुर ने किया एवं आभार डॉ. मोनिका वैष्णव ने माना।

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