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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सौंपा कलेक्टर के नाम ज्ञापन,,सरकार से मांगें पूरी करने की लगाई गुहार, कहा : ओटीपी मांगने में आती है समस्या

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सौंपा कलेक्टर के नाम ज्ञापन
सरकार से मांगें पूरी करने की लगाई गुहार, कहा : ओटीपी मांगने में आती है समस्या
देवास। संयुक्त आंगनवाड़ी संगठन के आह्वान पर प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। इसी कड़ी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं मिनी कार्यकर्ता संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम कलेक्टर कार्यालय में कलेक्टर कार्यालय में एवं महिला बाल विकास जिला कार्यक्रम अधिकारी के नाम संजय भारद्वाज ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिले के विभिन्न हिस्सों से आई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को रखते हुए आंदोलन को समर्थन दिया और शासन से जल्द निर्णय लेने की अपील की।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य शासन द्वारा संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जनहितैषी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे बच्चों, महिलाओं और समाज में व्यापक सुधार हुआ है। लेकिन इन केंद्रों में कार्यरत महिलाएं, जो समाज के कमजोर वर्गों से आती हैं, आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यह महिलाएं पूरी निष्ठा के साथ न केवल पोषण, शिक्षा और देखभाल का कार्य कर रही हैं, बल्कि सरकार के अन्य महत्वपूर्ण अभियानों जैसे चुनाव कार्य, जनगणना, आधार कार्ड पंजीयन और परिवार नियोजन में भी योगदान दे रही हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है और न ही उनके मानदेय एवं सुविधाओं में कोई ठोस वृद्धि हुई है।
संघ ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संपर्क ऐप पर कार्य करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शासन द्वारा दिए गए मोबाइल फोन भी पुराने और अनुपयोगी हो चुके हैं, जिससे ऑनलाइन कार्य करने में बाधा उत्पन्न हो रही है। सरकार यदि दो ऐप में कार्य करवा रही है तो इसे एक ऐप तक सीमित किया जाए, ताकि काम सुचारू रूप से हो सके। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की कि पांच वर्ष तक के बच्चों को सभी निजी और प्राइवेट स्कूलों में दाखिला देने पर रोक लगाई जाए, ताकि वे आंगनवाड़ी केंद्रों में आएं और शासन की योजनाओं का लाभ उठा सकें।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब 4-5 साल पहले मोबाइल फोन दिए गए थे, तब भी वे ठीक से काम नहीं कर रहे थे, क्योंकि वे 2जी टेक्नोलॉजी के थे और पोषण ट्रैकर ऐप को सपोर्ट नहीं करते थे। अब समय आ गया है कि सरकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अच्छी गुणवत्ता वाले मोबाइल या टैबलेट प्रदान करे, अथवा उनके खातों में 25,000 से 30,000 रुपये की राशि स्थानांतरित करे, जिससे वे स्वयं एक उपयुक्त मोबाइल फोन खरीद सकें। इसके अलावा, नेट रिचार्ज की राशि भी लंबे समय से नहीं मिली है। पहले 200 रुपये प्रति माह दिए जाते थे, लेकिन वर्तमान में कोई भुगतान नहीं हो रहा है, जबकि न्यूनतम 370 रुपये का रिचार्ज आवश्यक होता है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार या तो ब्रॉडबैंड सुविधा प्रदान करे या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कम से कम 500 रुपये प्रति माह इंटरनेट खर्च के लिए दे।
संघ ने यह भी कहा कि नियुक्ति के समय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम योग्यता आठवीं कक्षा थी, लेकिन अब उनसे लगातार ऑनलाइन कार्य करवाने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि यह उनके सेवा नियमों में शामिल नहीं था। जब ऑनलाइन कार्य शुरू किया गया था, तब अधिकारियों ने कहा था कि कोई भी इसे जन सेवा केंद्र या पड़ोसियों की मदद से कर सकता है। तब से कार्यकर्ता अपने स्वयं के पैसे खर्च कर जन सेवा केंद्रों से काम करवा रही हैं। सरकार को चाहिए कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कम से कम 2,500 रुपये अतिरिक्त राशि ऑनलाइन कार्यों के लिए प्रदान करे या फिर सुपरवाइजर और सीडीपीओ कार्यालयों में इन कार्यों को संपन्न कराया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से केवल हार्ड कॉपी में रिपोर्ट ली जाए।
संघ ने मांग की कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सिक्किम और पुदुचेरी की तर्ज पर स्थायी किया जाए। जब तक सरकार उन्हें स्थायी नहीं करती, तब तक उनका मासिक मानदेय 26,000 रुपये किया जाए और रिटायरमेंट पर 10 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान तथा पेंशन की सुविधा प्रदान की जाए। इसके अलावा, हितग्राहियों को टीएचआर देने के लिए फेस कैप्चर प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया गया है, लेकिन कई हितग्राही साइबर फ्रॉड के डर से ओटीपी साझा करने में हिचकिचाते हैं। इसलिए इस प्रक्रिया को हटाया जाए ताकि वितरण कार्य सहज रूप से किया जा सके।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि 31 मार्च तक उनकी मांगों पर अमल नहीं हुआ, तो 1 अप्रैल से प्रदेशभर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री रंजना राणा, प्रदेश उपाध्यक्ष रानी सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष संजना परसाई, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रुक्मणी यादव, संभाग अध्यक्ष जरीना खान, संभाग उपाध्यक्ष शर्मिला ठाकुर, जिला महामंत्री स्नेहलता गौड, अनीता सोलंकीख् बागली तहसील से अध्यक्ष शशि कला मेघवाल, सोनकच्छ से ज्योति शर्मा, नीता श्रीवास्तव, वरिष्ठ पदाधिकारी रामबान सिंह खाद्य उपस्थित रहे।


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