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अब लगेगा नगर निगम में संपत्ति कर दोगुना, तीन स्लैब बनाकर निर्धारण किया गया है टैक्स...कांग्रेस

अब लगेगा नगर निगम में संपत्ति कर दोगुना, तीन स्लैब बनाकर निर्धारण किया गया है टैक्स...कांग्रेस

 देवास : प्रदेश सरकार लगातार कर्ज के बोझ में दबती चली जा रही है उस कर्ज को पूरा करने के लिए सरकार लोगों पर नए-नए टैक्स लाद रही है । वर्तमान में नगरीय निकाय क्षेत्र में संपत्ति को लेकर जो संपत्ति कर लिया जाता था साथ ही संपत्ति कर पर जो पेनल्टी होती थी उस पेनल्टी की छूट को लेकर शासन के द्वारा  लोक अदालतों का आयोजन किया जाता रहा है जहां संबंधित भवन मालिक अपने संपत्ति कर का निर्धारण कर संपत्ति कर जमा कर दिया करता है।       सरकार की मंशा है कि लोगों की आदत टैक्स भरने की बजाय लोक अदालत में जाकर छूट लेकर निराकरण करने की ज्यादा बढ़ रही है जिससे लोग नगर निगम में समय पर टैक्स जमा नहीं कर रहे हैं लोक अदालत की व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त हो इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने संपत्ति कर के लिए एक नई गाइडलाइन जारी की है जिसके अंतर्गत तीन श्रेणियां में संपत्ति कर को बांटा गया है।देवास शहर में कुल चार रेट जोन हैं एक औद्योगिक क्षेत्र के साथ ही आवासीय ,कमर्शियल एवं स्वयं के उपयोग की संपत्ति ।इसके अंतर्गत अगर प्रॉपर्टी किराए के उपयोग के लिए है तो 6% 8% 10% संपत्ति कर लगेगा प्रॉपर्टी स्वयं के उपयोग के लिए है तो 3% 4%  5% कर लगेगा अगर प्रॉपर्टी का वार्षिक भाड़ा मूल्य 6000 है तो प्रॉपर्टी ,कर मुक्त रहेगी 180 रुपए फिक्स समेकित कर लगेगा। साथ ही पहले वित्तीय वर्ष मार्च होगा इस अवधि में अगर संपत्ति कर नहीं भरा तो अगले वर्ष 3% अतिरिक्त राशि होगी जो पिछले और वर्तमान वर्ष में साथ लगेगी जो बढ़कर 6% हो जाएगी। बाकी जो अन्य कर है जैसे शिक्षा उपकर, नगरी विकास कर उन्हें यथावत रखा गया है।           शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी व कार्यकारी अध्यक्ष प्रवक्ता सुधीर शर्मा ने बताया कि प्रदेश के नगरीय विकास विभाग ने बिना आम जनों की सहमति के या उनकी राय के बगैर संपत्ति कर का निर्धारण कर दिया आम नागरिकों के लिए लोक अदालत की व्यवस्था है जिसमें संबंधित व्यक्ति जाकर छूट प्राप्त कर अपनी संपत्ति का कर जमा कर देता था लेकिन अब लोक अदालत के माध्यम से दी जाने वाली छूट के कोई मायने नहीं रहेंगे । इस संदर्भ में सरकार कि सोच है कि लोग लोक अदालत में जाने के आदी हो चुके हैं उनकी आदत छुड़ाने के लिए ही नगरीय प्रशासन विभाग ने इस तरह की व्यवस्था बनाई है कि भवन मलिक समय पर संपत्ति कर जमा कर दे कांग्रेस का कहना है कि इस तरह से दोगुनी राशि का टैक्स वसूलना न्याय संगत नहीं है इस संदर्भ में सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए लोक अदालत की व्यवस्था जारी रहे साथ ही टैक्स की जो स्लैब अलग-अलग बनाई है उसे भी पूर्ववर्ती रखा जाए साथ ही 3 % ओर उसके बाद 6% टैक्स जोड़ना न्याय संगत नहीं है उसे भी तत्काल निरस्त किया जाए।

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