आंगनवाडी प्रतिनिधि मंडल ने केन्द्रीय बाल एवं विकास मंत्री से भेंट की प्रतिनिधियो ने बताई समस्याएं
देवास। ऑल इंडिया आंगनवाड़ी एम्पलाइज फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रतिनिधिमंडल ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ज्वलंत समस्याओं को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी से उनके कैंप कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की तथा सभी संगठनों के पदाधिकारी अपनी मांगों पर ध्यान आकर्षित कराया जिसमें प्रतिनिधिमंडल ने वर्ष 2026 के बजट पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं। वर्ष 2018 के बाद से अब तक मानदेय में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है, जिससे देशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में असंतोष व्याप्त है। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष प्रमुख मांगें रखीं जिसमें ऑनलाइन धोखाधड़ी की घटनाओं के कारण कई लाभार्थी ओटीपी साझा करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह बैंक से संबंधित हो सकता है और इससे उनकी बचत राशि को खतरा हो सकता है। एफआरएस अक्सर सटीक नहीं होता और कई प्रयासों के बाद ही काम करता है, जिससे अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए समय नहीं बचता। कई लाभार्थियों ने आधार से अपना मोबाइल नंबर लिंक नहीं किया है या फिर नंबर बदल चुके हैं, जिससे ओटीपी पुराने नंबर पर जाता है और वे टीएचआर नहीं ले पाते। जिन लाभार्थियों ने अपने रिश्तेदारों के आधार नंबर से पंजीकरण किया है, उनके लिए रिश्तेदार का उपस्थित रहना अनिवार्य है, जो कार्य के कारण संभव नहीं होता। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं का वजन बदलने से चेहरा बदल जाता है। विवाह के बाद भी चेहरा पहले की फोटो से अलग हो जाता है।इससे एफआरएस में फोटो मेल नहीं खाता और प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। कई बार पोषण ट्रैकर या आधार सर्वर डाउन होने से एफआरएस पूरा नहीं हो पाता। कई कार्यकर्ताओं को डेटा रिचार्ज के लिए धनराशि अग्रिम में नहीं दी गई और बाद में भी उसका भुगतान नहीं किया गया, जिससे उन्हें अपनी निजी आय से खर्च करना पड़ रहा है। इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एफआरएस की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उच्च अधिकारियों के लगातार दबाव के कारण आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अत्यधिक मानसिक तनाव में कार्य कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ग्रैच्युटी का अधिकार प्राप्त है। अप्रैल 2022 में यह आदेश पारित हुआ, लेकिन आज तक कर्नाटक राज्य को छोड़कर किसी अन्य राज्य में इसे लागू नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूर्णकालिक, स्थायी कर्मचारी हैं, न कि मानदेय कार्यकर्ता। अतः उन्हें तृतीय एवं चतुर्थ कर्मचारियों की तरह वेतनमान, महंगाई भत्ता, ग्रैच्युटी, पीएफ और पेंशन जैसे सभी लाभ दिए जाने चाहिए। सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सेवा निवृति के बाद 10,000 प्रतिमाह की पेंशन योजना लागू की जाए। शहरी क्षेत्रों में 1000 से अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों एवं दूरदराज के ग्रामों में, जनसंख्या मानदंड लागू किए बिना, नई आंगनवाड़ियों को स्वीकृति दी जाए। भीषण गर्मी को देखते हुए एक माह की पूर्ण ग्रीष्मकालीन छुट्टी घोषित की जाए एवं उस माह के लिए सूखा राशन प्रदान किया जाए। सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को आवश्यक ऐप्स चलाने हेतु टैब फोन प्रदान किए जाएं आदि शामिल है। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशीला खत्री, राष्ट्रीय सचिव सावित्री ठाकुर, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रंजना राणा, प्रदेश उपाध्यक्ष रानी सिंह, प्रदेश कार्यकारी रुक्मणी यादव आदि उपस्थित रहे। कोषाध्यक्ष रंजना राणा ने सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका बहनों को बताया कि 17 फरवरी 2026 को होने वाला आंदोलन आगे बढ़ा दिया गया है क्योंकि एफआरएस का कार्य एवं लग्न विवाह होने के कारण आंदोलन प्रभावित होगा।
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