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बाल श्रम मुक्ति के लिए सामूहिक रूप से कार्य करना आवश्‍यक - जिला पंचायत सीईओ श्रीमती ज्‍योति शर्मा-----------सरपंच ग्राम विकास कार्यों तक सीमित न कर सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक की भूमिका भी निभाएँ--------------बाल श्रम रोकथाम पर स्टेकहोल्डर्स परामर्श बैठक का आयोजन किया गया

बाल श्रम मुक्ति के लिए सामूहिक रूप से कार्य करना आवश्‍यक - जिला पंचायत सीईओ श्रीमती ज्‍योति शर्मा
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सरपंच ग्राम विकास कार्यों तक सीमित न कर सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक की भूमिका भी निभाएँ
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बाल श्रम रोकथाम पर स्टेकहोल्डर्स परामर्श बैठक का आयोजन किया गया
      देवास, 27 फरवरी 2026 [शकील कादरी] सतत बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बाल श्रम रोकथाम ‘’(रेस्क्यू से आगे की सोच)” विषय पर स्टेकहोल्डर्स परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। यह परामर्श विशेष रूप से निहाल समुदाय पर केंद्रित था, जो व्यापक रूप से आर्थिक रूप से पिछड़े हुए समुदाय हैं, जो की मुख्यधारा से वंचित रहा है और जहाँ बच्चे बाल श्रम एवं अन्य सामाजिक बुराइयों से प्रभावित रहा है। कार्यक्रम में जिला पंचायत की सीईओ श्रीमती ज्योति शर्मा, अपर कलेक्‍टर श्री संजीव जैन, श्रम विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारीगण, सरपंच, शिक्षक, अभिभावक, बच्‍चे एवं आरम्भ (एजुकेशन एंड कम्युनिटी डेवलपमेंट सोसाइटी) की टीम की उपस्थित थी।

      कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती ज्योति शर्मा ने सरपंचों से आह्वान किया कि वे केवल नियमित ग्राम विकास कार्यों तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक की भूमिका निभाएँ, विशेषकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए। उन्होंने कहा कि बाल श्रम के दुष्परिणाम सामान्य धारणा से कहीं अधिक गहरे और दीर्घकालिक होते हैं। सरपंच को “पंचायत के अभिभावक” बताते हुए उन्होंने कमजोर परिवारों को संरक्षण प्रदान करने का आग्रह किया।

      उन्होंने बाल अधिकारों की उन्नति में आरम्भ के कार्यों, विशेषकर बाल श्रम के प्रति इसके रोकथाम का दृष्टिकोण की सराहना की। उन्‍होंन कहा कि बच्चे एवं परिवार जो जन्म प्रमाणपत्र, मतदाता पहचान पत्र और समग्र आईडी जैसे वैधानिक दस्तावेजों से वंचित हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सरपंचों को जन्म प्रमाण-पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्‍होंने कहा कि बाल श्रम मुक्ति के लिए सामूहिक रूप से कार्य करना आवश्‍यक है।

      अपर कलेक्‍टर श्री संजीव जैन ने कहा कि बाल श्रम की रोकथाम के लिए व्यवहार परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा को केवल शासकीय रोजगार प्राप्ति का माध्यम न समझा जाए, बल्कि इसे मानसिक विकास, चिंतन क्षमता और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता में वृद्धि लाने का जरिया माना जाना चाहिए। ईंट भट्टा श्रमिकों के उदाहरण के माध्यम से उन्होंने समझाया कि शिक्षा व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता प्रदान करती है।

      आरम्भ संस्था के श्री अनुप किशोर सहाय ने की 33 वर्षों की यात्रा और बाल संरक्षण के प्रति उसकी सतत प्रतिबद्धता साझा की। “फैसलों से बदलती कहानी” शीर्षक से एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रदर्शित की गई, जिसमें दर्शाया गया कि उचित निर्णय और सामुदायिक आधारित हस्तक्षेप बच्चों के जीवन में किस प्रकार सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। इसके पश्चात एक पीपीटी प्रस्तुति तथा बाल श्रम रोकथाम पर स्टेकहोल्डर्स संवाद आयोजित किया गया।

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