आरिफ खान बने कादरी जहांगिरी सिलसिले के गादीनशीन
देवास। नालछा स्थित दरगाह पर काज़ी बाबा के 39वें उर्स के मौके पर आयोजित भव्य धार्मिक कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक घोषणा की गई। 62 वर्षों से रिक्त पड़ी इमामुल हादी सूफ़ी अल्लाहनूर शाह रहमतुल्लाह अलैह (मऊ) की गादी पर हाजी आरिफ भाई कादरी को औपचारिक रूप से कादरी जहांगिरी सिलसिले का गादीनशीन बनाया गया। यह अहम घोषणा सूफ़ी ए मालवा हाफ़िज़ व कारी अब्दुल हफ़िज़ मियाँ अशरफी, ख़तीबे हिंदोस्तान शाने दक्कन अल्लामा मौलाना कारी मोहम्मद अहमद नक़्शबंदी जुनेदी साहब क़िबला, हाफ़िज़ व काज़ी इरफ़ान कादरी साहब तथा मुजाहिदुल आरफ़ीन हज़रत सैय्यद नज़र अली शाह कलंदर बाबा साहब के दस्त-ए-मुबारक और उलमाए किराम की मौजूदगी में की गई। काज़ी बाबा ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. सैय्यद शाहनवाज़ अली ने बताया कि यह सनद फखरुल आरफ़ीन हज़रत मौलाना अब्दुल हई शाह जहांगीर (चट्टग्राम, बांग्लादेश) के पोते एवं नूरुल आरफ़ीन हज़रत अब्दुल हमीद शाह जहांगिरी रह.अ. के गादीनशीन हज़रत अब्दुर्रहमान शाह जहांगिरी द्वारा अता की गई है। उलमाओं ने दुआ की कि हिंदुस्तान में सिलसिला-ए-कादरी जहांगिरी से जुड़े तमाम लोग एकजुट होकर दीन की तब्लीग और सिलसिले की खिदमत को आगे बढ़ाएं। इस मुबारक अवसर पर धार और इंदौर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में उलमाए किराम, सूफ़ी संत एवं अकीदतमंद मौजूद रहे। सूफ़ी अमजद बाबा, इमरान बाबा कादरी, चाँद कादरी साहब, मुजफ्फर पहलवान, बंटी भाई, मोनू सदर, वाहिद भाई, पत्रकार विक्की सैय्यद, हाफ़िज़ मुजफ्फर भाई कादरी, रईस भाई कादरी, मुस्ताक भाई कादरी, ज़हीर भाई कादरी, मुबारिक बाबा, निज़ाम भाई, मोईन भाई, अली भाई सैय्यद (मऊ), इमरान बाबा (मऊ), गब्बर भाई (मऊ), लखन दास महाराज (देवास) एवं सनी मालवीय जी (देवास) सहित अनेक मुरीदीन और खलीफाओं ने हाजी आरिफ भाई कादरी को मुबारकबाद दी। कार्यक्रम का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ।

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