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सांस की डोरी संभाले बैठा है, उस परमात्मा को हम भूल बैठे हैं इसलिए दुखी हैं.. सद्गुरु मंगल नाम साहेब

सांस की डोरी संभाले बैठा है, उस  परमात्मा को हम भूल बैठे हैं इसलिए दुखी हैं.. सद्गुरु मंगल नाम साहेब 

देवास। दुनिया में लोग इतनी अपाधापी में है कि मन में धीरज नहीं रखते है। जो भी हमारा काम बिगड़ा है वह हमारे कर्मों के बिगड़ने से बिगड़ा, धीरज नहीं रखने से और परमात्मा पर भरोसा नहीं करने से बिगड़ा है। हम परमात्मा से भरोसा छोड़ देते हैं। जिसने जन्म दिया स्वास की डोरी से जो संभाले बैठा है, उस पर से  भरोसा उठना कितनी बड़ी बात है। जो आपकी हर सांस में आपकी देखरेख कर रहा है निर्मोही और निरबेर होकर। उसको हम भूल बैठे हैं। घड़ी दो घड़ी के मित्र कपड़े चमड़े, झूठे लोगों के साथ हो जाते हैं। जो घड़ी दो घड़ी के हैं और फिर रंग बदल लेते हैं। साथ छोड़ देते हैं। जो सब घट में बैठा हुआ है,जो सबके साथ 24 घंटे हैं, वह कैसे बेईमान हो सकता है। आदमी उस पर भरोसा नहीं कर रहा है। जो सब घट बैठा, सचेत श्वास रूप में सुलभ है सब दिन, आप कहीं किसी भी मजहब में धर्म में स्थान पर खड़े हो जाओ। यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने सदगुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थली सेवा समिति मंगल मार्ग टेकरी द्वारा आयोजित गुरुवाणी पाठ, गुरु शिष्य चर्चा के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि कोई कपड़े बदलकर, तो कोई तोल बाट लेकर बैठ गया। यह 10 ग्राम, यह 50 ग्राम। शेर बाट समझे, जब तक ग्राम में आ जाए। ग्राम समझे तब तक किलोग्राम में आ जाए। बाट बदल बदल करके, नाम बदल बदल करके दुनिया को ठग रहे है। कब तक बदलोगे। पढ़ाई और भाषा बदलकर लोगों को ठग रहे हैं। हिंदी में समझो तब तक अंग्रेजी में बोलने लग जाए। अंग्रेजी समझो जब तक अरबी में  बोलने लग जाए। दुनिया के ठगने के तरीके कैसे समझे हम। एक समझे तब तक दूसरा समझाने खड़ा हो जाए। आगे कहा कि सांस में कोई वजन है क्या, बिना तोले ले रहे है कि नही। जो बिना तोले और बिन बोले जो सारे भेद खोल देती हैं।  बिन रचना वाणी बड वकता। बिना जुबान के जो वाणी आ रही है। वह श्वास की धुन से कंपन से शुरू हो रही है। वह बिना बोले और बिना जुबान के बिना छुए ही आ रही है। इसलिए अमितत्व को जो धारण करता है वह सारे संसार को जीवन दान दे रहा है। इस दौरान साध संगत द्वारा सद्गुरु मंगल नाम साहेब, नीरज साहेब को श्रीफल भेंट कर व  आरती कर  आशीर्वचन लिए। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।


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