विश्वगीता प्रतिष्ठानम् का
सूर्य उपासना एवं नवसंवत्सर 2083 अभिनंदन आयोजन सम्पन्न
देवास। नव संवत्सर चौत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 के आगमन पर मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग और विश्वगीता प्रतिष्ठानम् देवास के संयुक्त आयोजन में अपनी परम्परा को अक्षुण्ण बनाए रखते नगर की गौरव स्थली शिवाजी उद्यान पर सूर्य उपासना एवं नवसंवत्सर 2083 अभिनंदन का गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ । विश्वगीताप्रतिष्ठानम् सप्त उत्सव प्रमुख रमेश जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रान्त कोष प्रमुख नरेन्द्र शर्मा, प्रान्त शिक्षण प्रमुख डॉ मनीषा सोनी, संयोजक कृष्णकांत शर्मा के निर्देशन में विभावरी बेला में गणमान्य नागरिकों द्वारा दीप- प्रज्ज्वलन, गुड़ी पूजन किया गया, सह संयोजक जितेन्द्र त्रिवेदी ने स्वस्ति वाचन, शंखनाद से वातावरण दिव्य कर दिया। कृष्णकांत शर्मा ने भारतीय कालगणना के महत्व पर अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि शून्य और अनंत गणित के दो अनमोल रत्न हैं। रत्न के बिना जीवन चल सकता है,परन्तु शून्य और अनंत के बिना गणित कुछ भी नहीं। भारतीय काल गणना परमाणु और अणु की सूक्ष्मतम इकाई से लेकर ब्रह्मा जी के एक दिन कल्प और ब्रह्मा जी की पूर्ण आयु भगवान श्री हरि के एक निमेष तक की विराटतम गणना पर प्रकाश डाला जिसमें परमाणु,अणु, त्रसरेणु,त्रुटि से लेकर प्रहर, दिन ,सप्ताह,मास ऋतु, अयन, संवत्सर ,दिव्यवर्ष युग मन्वंतर ब्रह्मा की आयु के साथ श्री हरि के काल से परे स्वरूप इत्यादि पर अपने विचार व्यक्त किये। आपने संवत्सर रूप कालचक्र के गणितीय सार में छिपे हमारे महान भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल आधार को अपनी ओजस्वी वाणी में बताया।जब विश्व कुछ नहीं जानता था, तब भारत ने अनंत खोजा। संस्कृत का एकम् हिन्दी में एक हुआ, अरबी व ग्रीक में बदल कर ‘वन‘ हुआ। शून्य अरबी में सिफर हुआ, ग्रीक में जीफर और अंग्रेजी में जीरो हो गया। इस प्रकार भारतीय अंक दुनिया में छाये। अंक गणित- अंकों का क्रम से विवेचन यजुर्वेद में मिलता है - सविता प्रथमेऽहन्नग्नि र्द्वितीये वायुस्तृतीयऽ आदिचतुर्थे चन्द्रमारू पञ्चमऽऋतुरूषष्ठे मरूतरू सप्तमे बृहस्पतिरष्टमे। नवमे वरुणो दशमंऽइन्द्र एकादशे विश्वेदेवा द्वादशे। (यजुर्वेद-३९-६)।
इसमें विशेषता है अंक एक से बारह तक क्रम से दिए हैं। डॉ मनीषा सोनी ने गीताजी के पुरुषोत्तम योग पाठ व अनुगायन करवाया। नगर के गणमान्य नागरिकों ने गीताजी की आरती की, सूर्यनारायण देवता को सभी ने सामूहिक अर्घ्य दिया, वैदिक मंत्रोच्चार, जय घोष ने सम्पूर्ण वातावरण को दिव्य बना दिया।उपस्थित सभी को स्वस्ति तिलक, नवसंवत्सर का औषधीय प्रसाद गुड़ धनिया नीम कोंपल प्रसाद वितरण किया गया, शिक्षाविद गेरूलाल व्यास ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में नवसंवत्सर की शुभकामना देते हुए कहा कि रस, राग और सुगंध से भरी प्रकृति का उत्सव नव संवत्सर है, विश्वगीता प्रतिष्ठानम् के सांस्कृतिक मूल्यों को समर्पित करने वाला सनातन धर्म का प्रयास बताया और नवसंवत्सर पर सभी को शुभकामनाएं दी। ब्राह्मण समाज वरिष्ठ मधुसूदन शर्मा ने अपने मुख्य अतिथि उद्बोधन में कहा कि आओ गर्व करें अपने पूर्वजों पर, जयति पुण्य सनातन संस्कृति, जयति पुण्य भूमि भारत। घनश्याम जोशी, एस एन आर्य द्वारा सभी उपस्थित सदस्यों का सारस्वत सम्मान उत्तरीय वस्त्र और स्वस्तिवाचन से किया गया। इस अवसर पर अरुण शैव, नृत्युगुरु प्रफुल्ल सिंह गहलोत, रोहित सिंह गुर्जर, हजारीलाल जाट, अशोक बुनकर, पंकज प्रधान, दिनेश शर्मा, राकेश तिवारी, श्री श्रीवास्तव, मुक्ति शर्मा, शांताराम पाटिल, अशोक वर्मा, हेमचंद्र आर्य, नरेन्द्र दुबे, अनिल आर्य सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन उमेश जोशी ने तथा आभार कमलकांत मेहता ने व्यक्त किया।

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