वनरक्षकों ने सीखी हरियाली की तकनीक
शंकरगढ़ पहाड़ी पर 83वें बैच का व्यावहारिक प्रशिक्षण संपन्न
देवास । पर्यावरण संरक्षण और वानिकी के गुर सिखाने के उद्देश्य से वन विद्यालय झाबुआ के 83 वें प्रशिक्षु वनरक्षक बैच ने देवास के प्रसिद्ध शंकरगढ़ पहाड़ी क्षेत्र का भ्रमण किया। वन मंडलाधिकारी अमित चौहान के निर्देशन में आयोजित इस चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 48 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।
प्रमुख जिलों के प्रशिक्षु हुए शामिल
वैभव उपाध्याय (वन क्षेत्रपाल) के नेतृत्व में आए इस दल में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे खंडवा, बुरहानपुर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार और इंदौर के वनरक्षक शामिल थे। कार्यक्रम का सफल संचालन उपवन क्षेत्रपाल श्री राकेश मोदी द्वारा किया गया।
पहाड़ी को हरा-भरा बनाने के सामुदायिक प्रयासों पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और विशेषज्ञों ने प्रशिक्षुओं को शंकरगढ़ पहाड़ी के कायाकल्प की कहानी सुनाई। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी दी गई-
सामुदायिक सहभागिता- कैसे जन-भागीदारी से एक पहाड़ी को वन का रूप दिया गया।
विशेषज्ञ मार्गदर्शन-राजेश चौहान (वन परिक्षेत्राधिकारी), श्याम शर्मा (परिक्षेत्र सहायक), और कृष्णा यादव (वनरक्षक) ने वानिकी कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
ग्रीन आर्मी का योगदान- ग्रीन आर्मी के भरत पाटीदार ने वन संरक्षण और जागरूकता के जमीनी अनुभवों को साझा किया।
इन वाटिकाओं और तकनीकों का किया अवलोकन
प्रशिक्षुओं ने पहाड़ी पर स्थित विभिन्न वाटिकाओं का भ्रमण कर वहां की कार्यप्रणाली को समझा।
विविध वाटिकाएं- त्रिवेणी वाटिका, स्मृति वाटिका, न्याय वाटिका, पुलिस वाटिका और मियांवाकी वृक्षारोपण।
तकनीकी ज्ञान- नगर वन क्षेत्र में रोपित की गई 42 प्रजातियों, पौधारोपण तकनीक, और भू-जल संरक्षण के लिए बनाई गई संरचनाओं का अध्ययन किया।
नवाचार- प्रशिक्षुओं ने सीड बॉल निर्माण और बीज रोपण की विधियों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नए वनरक्षकों को किताबी ज्ञान से हटकर धरातल पर हो रहे सफल प्रयोगों से परिचित कराना था, ताकि वे अपने क्षेत्रों में जाकर वनों के प्रति जागरूकता और संरक्षण के कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।

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