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कलेक्‍टर श्री ऋतुराज सिंह ने स्कूल संचालकों, पुस्तक प्रकाशकों एवं विक्रेताओं के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए देवास जिले की संपूर्ण सीमा के लिए निर्देश जारी किये

कलेक्‍टर श्री ऋतुराज सिंह ने स्कूल संचालकों, पुस्तक प्रकाशकों एवं विक्रेताओं के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए देवास जिले की संपूर्ण सीमा के लिए निर्देश जारी किये
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पुस्तकें, कॉपियां, यूनिफॉर्म आदि सम्बन्धित स्कूल/संस्था अथवा किसी भी एक दुकान/विक्रेता/संस्था विशेष से क्रय किये जाने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा
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अधिकतम दो से अधिक यूनिफॉर्म नहीं होगी, कम से कम 03 वर्ष तक यूनिफॉर्म में परिवर्तन नहीं किया जाये
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परीक्षा परिणाम के पहले पुस्तकें क्रय करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा, अभिभावक पुस्तकों की उपलब्धता के आधार पर 30 अप्रैल 2026 तक क्रय कर सकेंगे
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सी.बी.एस.ई बोर्ड से सम्बन्ध समस्त वि‌द्यालयों में एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्य पुस्तकें ही क्रय की जायेगी
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स्कूल के बस्ते का वजन स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार निर्धारित वजन से ज्‍यादा नहीं होगा
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स्कूल संचालक/प्राचार्य स्कूल प्रत्येक कक्षा के लिये अनिवार्य पुस्तकों की सूची परीक्षा परिणाम के पूर्व ही स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे

  देवास 10 मार्च 2026 [शकील कादरी] कलेक्‍टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री ऋतुराज सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (1) (2) के तहत स्कूल संचालकों, पुस्तक प्रकाशकों एवं विक्रेताओं के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए देवास जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा के लिए निर्देश जारी किये है।

     जारी निर्देशानुसार स्कूल संचालक/प्राचार्य स्कूल में संचालित प्रत्येक कक्षा के लिये अनिवार्य पुस्तकों की सूची विद्यालय के परीक्षा परिणाम के पूर्व ही अपने स्कूल की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे एवं वि‌द्यालयीन सार्वजनिक सूचना पटल/ स्थान पर चस्पा करेंगे। मान्यता नियमों के अन्तर्गत स्कूल की स्वयं की वेबसाइट होना अनिवार्य है। स्कूल के प्राचार्य/संचालक पुस्तकों की सूची की एक प्रति प्रवेशित अभिभावकों को प्रवेश के समय एवं परीक्षा परिणाम के समय आवश्यक रूप से उपलब्ध, कराने के साथ ही नवीन सत्र प्रवेश होने के एक माह पूर्व पुस्तकों की सूची विभिन्न स्त्रोतों के माध्यम से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे।

     स्कूल संचालक/प्राचार्य वि‌द्यार्थी एवं उनके अभिभावकों को सूचीबध्द पुस्तकें परीक्षा परिणाम अथवा उसके पूर्व क्रय करने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। अभिभावक पुस्तकों की उपलब्धता के आधार पर 30 अप्रैल 2026 तक क्रय कर सकेंगे। ऐसी स्थिति में अप्रैल माह में प्रारंभ होने वाले शैक्षणिक सत्र का उपयोग यथासंभव विद्यार्थियों के ओरिएंटेशन व्यवहारिक ज्ञान एवं रिवीजन के लिए किया जाए।

     स्कूल जिस नियामक बोर्ड यथा सी.बी.एस.ई./आई.सी.एस.ई/एम.पी.बी.एस.ई/ माध्यमिक शिक्षा मण्डल आदि से सम्बध्य है, उस संस्था के ‌द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम व पाठ्यक्रम के अन्तर्गत नियामक संस्था अथवा उसके ‌द्वारा विधिकरूप से अधिकृत ऐजेंसी यथा एन.सी.ई.आर.टी. म.प्र पाठ्य पुस्तक निगम आदि के द्वारा प्रकाशित एवं मुद्रित पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों/मुद्रकों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों को वि‌द्यालय में अध्यापन के लिए न्यूनतम रखे ताकि अभिभावकों पर वित्तीय भार कम हो।

     सी.बी.एस.ई बोर्ड से सम्बन्ध समस्त वि‌द्यालयों में एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्य पुस्तंके ही क्रय की जायेगी। म.प्र. राजपत्र भोपाल दिनांक 02 मार्च 2020 दवारा सभी अशासकीय, हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी वि‌द्यालयों में कक्षा 09वीं से 12वीं तक म.प्र. शासन द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाना अनिवार्य होगा। साथ ही म.प्र. पाठ्यपुस्तक निगम के द्वारा मुद्रित पुस्तकों के द्वारा ही विद्यालय में शिक्षण का कार्य कराया जाएगा। वि‌द्यालय आवश्यकतानुसार नियत पाठ्यक्रम अंतर्गत अन्य सहायक पुस्तकें नियत संख्या में उपयोग में ला सकेंगे जैसा कि शासन द्वारा विर्निदिष्ट किया जाए।

     स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार स्कूल के बस्ते का वजन कक्षा 1 से 2 के लिए 1.5 (कि.ग्रा.), कक्षा 3 से 5 के लिए 2-3 (कि.ग्रा), कक्षा 6 से 7 के लिए 4 (कि.ग्रा.), कक्षा 8 से 9 के लिए 4.5 (कि ग्रा) त‍था कक्षा 10 के लिए 5 (कि.ग्रा.) निर्धारित है एवं एनसीईआरटी द्वारा नियत पाठ्यपुस्तकों से अधिक पुस्तकें बस्ते में नही रहेगी।

     स्कूल संचालक/प्राचार्य सुनिश्चित करेंगे कि उक्त के अतिरिक्त अन्य विषयों जैसे नैतिक शिक्षा, सामान्य ज्ञान, कम्प्यूटर आदि की निजी प्रकाशकों/मुद्रकों द्वारा प्रकाशित पुस्तकें क्रय करना अनिवार्य न किया जाएं। स्कूल संचालक/प्राचार्य द्वारा विद्यार्थियों/अभिभावकों को पुस्तकें, काूपियां, सम्पूर्ण यूनिफॉर्म आदि सम्बन्धित स्कूल/संस्था अथवा किसी भी एक दुकान/विक्रेता/संस्था विशेष से क्रय किये जाने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा।

     स्कूल संचालक/प्राचार्य/पालक शिक्षक संघ (पी.टी.एम) सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी स्थिति में पुस्तकों के निजी प्रकाशक/मुद्रक/विक्रेता स्कूल परिसर में प्रचार-प्रसार हेतु किसी भी स्थिति में प्रवेश नहीं करें।स्कूल संचालक/प्राचार्य/ विक्रेता द्वारा पुस्तकों के सेट की कीमत बढ़ाने के लिए अनावश्यक सामग्री जो निर्धारित पाठ्यक्रम से सम्बन्धित ही नहीं है का समावेश सेट में नहीं किया जावेगा। कोई भी विक्रेता किसी भी कक्षा के पूरे सेट को क्रय करने की बाध्यता नहीं रखेगा, यदि किसी वि‌द्यार्थी के पास पुरानी पुस्तकें उपलब्ध हैं तो उसे केवल उसकी आवश्यकता की पुस्तकें ही विक्रेता द्वारा उपलब्ध कराई जायेंगी।

     नोट बुक, कॉपी पर ग्रेड किस्म, साइज, मूल्य, पृष्ठ संख्या स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिये, किसी भी पुस्तक, नोट बुक, कॉपी अथवा इन पर चढ़ाये जाने वाले कवर पर विद्यालय का नाम मुद्रित सामग्री क्रय करने हेतु बाध्य न किया जाए। कोई भी स्कूल/संस्था किसी पुस्तक विक्रेता को पूरा किताब सेट, किसी भी सप्लायर अथवा ठेकेदार से लेने के लिये बाध्य न करें। पुस्तक विक्रेता पुस्तकें खरीदने के लिए स्वतंत्र हो इसका पालन हो। कोई भी विद्यालय अधिकतम दो से अधिक यूनिफार्म निर्धारित नहीं कर सकेंगे। ब्लेजर/स्वेटर इसके अतिरिक्त होगा। वि‌द्यालय प्रशासन द्वारा यूनिफार्म का निर्धारण इस प्रकार किया जा सकेगा कि कम से कम 03 वर्ष तक इसमें परिवर्तन नहीं हो वि‌द्यालय प्रशासन द्वारा वार्षिकोत्सव अथवा अन्य किसी आयोजन पर किसी भी प्रकार की वेशभूषा को वि‌द्यार्थियों/पालकों को क्रय करने के लिए बाध्य नहीं किया जावेगा।

     जिन विषयों के सम्बन्ध में नियामक संस्था द्वारा कोई पुस्तक प्रकाशित/ मुद्रित नहीं की गई है उस विषय से सम्बन्धित किसी अन्य पुस्तक को अनुशंसित किये जाने के पूर्व स्कूल संचालक सुनिश्चित करेंगे कि उक्त पुस्तक की पाठ्य सामग्री ऐसी आपत्तिजनक नहीं हो जिससे कि लोक प्रशांति भंग होने की संभावना हो।

     यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा तथा इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति/संस्था/आयोजक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के अंतर्गत कार्यवाही की जा सकेगी। विद्यालय द्वारा उक्त आदेशों की अव्हेलना किये जाने पर शाला के प्राचार्य/संचालक के साथ ही शाला का प्रबंधक/बोर्ड डायरेक्टर्स के समस्त सदस्य भी दोषी होंगे। जिले के समस्त विद्यालय अपने नोटिस बोर्ड पर उक्त सूचना चस्पा करें। विद्यालय के प्राचार्य उक्त आदेशों की जानकारी प्रबन्धक की प्रथम बैठक में सविस्तार रखना सुनिश्चित करें। इस आदेश के तारतम्य में विशेष परिस्थितियों में अनुमति अधोहस्ताक्षरकर्ता से ली जा सकेगी।

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