अति प्राचीन श्री आदेश्वर जैन मंदिर में 41वीं ध्वजा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुई
देवास। अति प्राचीन श्री आदेश्वर जैन मंदिर में 41वीं ध्वजा का पावन अनुष्ठान पू. आचार्य श्री विश्वरत्न सागर सूरीश्वरजी म सा आदि साधु भगवंत के सानिध्य में अत्यंत हर्षाेल्लास एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। मंदिरजी में मुकेशकुमारजी तरवेचा की ओर 17 महापूजन का आयोजन किया गया। जिसमें ध्वजा पूजन में मंदिरजी के शिखर पर ढोल नगाड़े की गूंज और जय जयकार के नारों के बीच ध्वजा आरोहण की क्रिया सपन्न हुई। मुख्य ध्वजा गिरीश कुमार सुराणा परिवार द्वारा विधिपूर्वक चढ़ाई गई। इसी अवसर पर जैन समाज को सिद्धचक्र जी की प्रतिष्ठा का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ, जिसकी ध्वजा का लाभ श्रीमती विमला बहन बसंत सिंह चौधरी परिवार द्वारा लिया गया।
इसके साथ ही मणिभद्रजी की ध्वजा मांगीलाल छगनीराम जैन परिवार द्वारा एवं नाकोड़ा भैरवजी की ध्वजा श्रीमती सजनबाई बाबूलाल सेठिया परिवार द्वारा चढ़ाई गई। वार्षिक ध्वजा महोत्सव में बड़ी संख्या में समाजजन ने भाग लिया। इस पावन अवसर पर श्री शांतिनाथ भगवान की अत्यंत सुंदर एवं कलात्मक रजत आंगी आदेश्वर जैन महिला मंडल द्वारा बनवाई गई, जिसे भरतेश कुमार शांतिलाल जैन परिवार द्वारा परमात्मा को अर्पित कि गई।
साथ ही श्रीआदिनाथ भगवान की भी आकर्षक एवं कलात्मक आंगी का निर्माण किया गया। तत्पश्चात आराधना भवन में आचार्य श्री विश्वरत्नसागरजी म सा के प्रवचन हुए। पूज्य श्री ने ध्वजा का महत्व बताते हुए कहा परमात्मा की ध्वजा अत्यंत मंगलकारी होती है,ध्वजारोहण के दर्शन से पुण्यानुबंधी पुण्योदय होता है । अंत में श्री संघ द्वारा स्वामीवत्सल्य का आयोजन किया गया।आदेश्वर ट्रस्ट मंडल ने सकल श्री संघ का आभार व्यक्त किया।
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