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श्रमिकों के अधिकारों पर कुठाराघात”, देवास में उद्योगों और श्रम विभाग पर गंभीर आरोप

श्रमिकों के अधिकारों पर कुठाराघात”, देवास में उद्योगों और श्रम विभाग पर गंभीर आरोप
देवास। श्रमिक संगठन इंटक और जनप्रतिनिधियों ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्योग प्रबंधन और मध्यप्रदेश शासन के श्रम विभाग पर श्रमिकों के शोषण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। वरिष्ठ अभिभाषक बी. एन. नागर, पूर्व महापौर रेखा वर्मा, इंटक जिला अध्यक्ष महेश तथा इंजीनियरिंग मजदूर सेवा संघ अध्यक्ष रामचन्द्र गुर्जर ने कहा कि श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। इंटक जिलाध्यक्ष महेश राजपूत ने कहा कि 1 अप्रैल 2024 से लागू न्यूनतम वेतन और परिवर्तनशील महंगाई भत्ते (डीए) के तहत प्रति श्रमिक ₹2225 मासिक एरियर बनता है, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया। जबकि इस संबंध में उद्योगों द्वारा लिया गया स्थगन आदेश 3 दिसंबर 2024 को उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त किया जा चुका है। इसके बावजूद उद्योगों ने 1 अप्रैल 2025 से नया वेतनमान लागू कर दिया, लेकिन पुराने एरियर का भुगतान नहीं किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया गया कि जॉनडिअर, पेंटागन, आयशर, गजरा गियर्स, विप्पी इंडस्ट्रीज सहित कई कंपनियों में ठेका श्रमिकों से 8 घंटे के बजाय 12 घंटे तक कार्य लिया जा रहा है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। साथ ही कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों से कार्य लेकर उन्हें अकुशल श्रमिकों के बराबर वेतन दिया जा रहा है। इसी तरह बार्लोकर, कोमवेल, कमिन्स, सनफार्मा, संघवी फूड इंडस्ट्री, कृति सोया और मधु सोया जैसी अन्य कंपनियों पर भी समान आरोप लगाए गए। इंजीनियरिंग मजदूर सेवा संघ के अनुसार उज्जैन रोड क्षेत्र के 50-60 उद्योगों में श्रमिकों से 12 घंटे तक कार्य लिया जा रहा है और कई जगह न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है।
        पूर्व महापौर रेखा वर्मा ने पर्यावरणीय मुद्दों को उठाते हुए कहा कि देवास के केमिकल और फार्मा उद्योगों द्वारा दूषित जल और रासायनिक अपशिष्ट जल स्रोतों में छोड़े जा रहे हैं, जिससे जल, भूमि और वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने पेंटागन उद्योग सहित कई फैक्ट्रियों में साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों के पालन पर भी सवाल उठाए। वरिष्ठ अभिभाषक बी. एन. नागर ने बताया कि टाटा समूह के लेडीज फुटवियर प्लांट को 2018 से बंद कर उत्पादन चेन्नई स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे 700 से अधिक महिला श्रमिक प्रभावित हुईं। औद्योगिक न्यायाधिकरण द्वारा इस बंदीकरण को अवैध घोषित किए जाने के बावजूद श्रमिकों को पुनः कार्य पर नहीं लिया गया और न ही बकाया वेतन दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि देवास के उद्योगों में स्थायी नौकरियों को समाप्त कर ठेका और फिक्स टर्म श्रमिकों से स्थायी कार्य कराया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। श्रमिकों को ओवरटाइम, बोनस, न्यूनतम वेतन और दुर्घटना की स्थिति में उचित मुआवजा तक नहीं मिल रहा। अंत में श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही श्रमिकों के बकाया भुगतान और अधिकार सुनिश्चित नहीं किए गए, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

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