जिला बदर नोटिस के खिलाफ वकीलों का प्रदर्शन, राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई का आरोप,,
अभिभाषक संघ ने जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन
देवास। अभिभाषक संघ देवास ने अपने सदस्य अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह गौड़ के विरुद्ध चल रही जिला बदर की कार्यवाही को निराधार और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए मंगलवार को जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा। संघ ने मांग की है कि उक्त प्रकरण को तत्काल समाप्त किया जाए। ज्ञापन में संघ अध्यक्ष एड. अशोक वर्मा ने बताया कि अधिवक्ता समाज का एक प्रतिष्ठित वर्ग है, जो न्यायालय में “ऑफिसर ऑफ द कोर्ट” जैसे गरिमामय पद को सुशोभित करता है। देवास अभिभाषक संघ प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है और इसके सदस्य भी उसी अनुरूप आचरण करते हैं। संघ ने बताया कि अधिवक्ता जितेन्द्र सिंह गौड़ वर्ष 2023 से नियमित सदस्य हैं और एक प्रतिभाशाली व सौम्य व्यवहार वाले युवा वकील के रूप में जाने जाते हैं। उनके विरुद्ध जारी कारण बताओ नोटिस (प्रकरण क्रमांक 0016/जिलाबदर/2026) को लेकर संघ ने उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन किया, जिसमें पाया गया कि उनके खिलाफ दर्ज पुराने प्रकरण वर्ष 2007 से 2023 के बीच के हैं और सभी राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। इन मामलों में कहीं भी दोष सिद्ध नहीं हुआ है तथा 2023 के बाद कोई नया मामला दर्ज नहीं है। संघ ने यह भी उल्लेख किया कि गौड़ छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं और वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी देवास ग्रामीण के जिला संगठन महासचिव के पद पर कार्यरत हैं। हाल के महीनों में उन्होंने विभिन्न जनहित मुद्दों को लेकर आंदोलन और प्रदर्शन किए, जिन्हें मीडिया में भी प्रमुखता मिली। अभिभाषक संघ का आरोप है कि इन्हीं राजनीतिक गतिविधियों से आहत होकर उनके विरुद्ध बिना ठोस आधार के जिला बदर की कार्यवाही शुरू कराई गई है। संघ ने स्पष्ट किया कि अपने सदस्यता काल के दौरान गौड़ के खिलाफ किसी भी अवैध गतिविधि या सामाजिक भय उत्पन्न करने जैसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है और उनका व्यवहार सदैव सौहार्दपूर्ण रहा है। संघ ने जिलाधीश से आग्रह किया कि उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर इस प्रकरण को प्रथम दृष्टया निराधार मानते हुए समाप्त करने की कृपा करें। इस दौरान संघ उपाध्यक्ष गीता शर्मा, उपाध्यक्ष पंकज पंड्या, कोषाध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह तोमर, पुस्तकालय सचिव श्वेतांकराज शुक्ला सहित अनेक वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित थे।

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