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विहाररत जैन संतों की सुरक्षा को लेकर जैन समाज ने उठाई आवाज - रीवा हादसे की उच्चस्तरीय जांच और “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की मांग

विहाररत जैन संतों की सुरक्षा को लेकर जैन समाज ने उठाई आवाज,,,
 रीवा हादसे की उच्चस्तरीय जांच और “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की मांग

देवास। रीवा में विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी के साथ हुई दुखद घटना जिसमें एक तेज रफ्तार कार ने विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को कुचल दिया जिसमें दो हादसे में दो साध्वियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य साध्वी गंभीर रूप से घायल हैं और उनका अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे को लेकर जैन समाज में गहरा आक्रोश एवं शोक व्याप्त है। समाजजनों ने इस घटना को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने तथा विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
समस्त जैन समाज की ओर से जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री एवं भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपे गए। ज्ञापन में कहा गया कि जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निहत्थे एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो समाज को शांति, संयम और अहिंसा का संदेश देते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं और हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। ज्ञापन में रीवा घटना की एसआईटी अथवा न्यायिक जांच कराने, घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी  फुटेज, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही यदि घटना में किसी प्रकार की साजिश या सुनियोजित कृत्य सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों पर कठोर धाराएं लगाने की बात भी कही गई है। जैन समाज ने विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा के लिए “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग करते हुए विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक तथा हाईवे एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
इसके अतिरिक्त भारत सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की मांग करते हुए पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन, सुरक्षा एसओपी एवं संवेदनशील मार्गों के लिए विशेष प्रावधान तैयार करने की आवश्यकता बताई गई है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि संत आत्मरक्षा नहीं करते तथा किसी प्रकार के सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते, इसलिए संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए। साथ ही स्थानीय स्तर पर “संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल ” एवं आपातकालीन संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की मांग भी उठाई गई। जैन समाज ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज की महिला एवं समाजजन उपस्थित थे।

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