Header Ads Widget

Responsive Advertisement

Recent Updates

6/recent/ticker-posts

अहंकार का अंत निश्चित, प्रेम से मिलता है ईश्वर का चरण और शरण- आचार्य कमलनयन शास्त्री

अहंकार का अंत निश्चित, प्रेम से मिलता है ईश्वर का चरण और शरण- आचार्य कमलनयन शास्त्री

देवास। जय बाल हनुमान मंदिर में शिवशक्ति नगर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यास पीठ से विराजमान श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा के सरस आचार्य श्री कमलनयन शास्त्री ने भक्तों को कथा अमृत का रसपान कराया। आचार्य श्री ने अपने मुखारविंद से ईश्वर के विभिन्न अवतारों एवं लीलाओं का वर्णन करते हुए प्रह्लाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष तथा राम जन्म प्रसंग का संक्षिप्त एवं भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि संसार में जब-जब अहंकार और अत्याचार बढ़ा है, तब-तब ईश्वर ने पृथ्वी पर अवतार लेकर अधर्म और अहंकार का विनाश किया है। इसलिए मनुष्य को जीवन में कभी भी किसी प्रकार का अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि जहां अहंकार होता है वहां विनाश निश्चित होता है। उन्होंने कहा कि जहां प्रेम है, वहीं ईश्वर का वास है। जब व्यक्ति के भीतर प्रेम भाव जागृत होता है, तब उसे भगवान के चरण एवं शरण की प्राप्ति होती है। किसी संत के चरण और ईश्वर की शरण प्राप्त हो जाए तो मानव जीवन धन्य हो जाता है। कथा के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुति से श्रद्धालु भक्तिमय वातावरण में झूम उठे। भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने नृत्य एवं जयघोष के साथ भगवान की लीलाओं का आनंद लिया। इसके पश्चात महाआरती संपन्न हुई। व्यास पीठ से जानकारी दी गई कि आगामी कथा में गिरिराज धरण, गिरिराज पूजा एवं 56 भोग प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर पंडित अरुण मिश्र ने सभी श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह किया कि वे प्रतिदिन दोपहर 3 बजे मंदिर परिसर में पहुंचकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

Post a Comment

0 Comments

Join Our WhatsApp Group? for latest and breaking news updates...
Click here to join the group...