अधिक मास में जो भी मनुष्य भक्ति जब तप करता हैं उसके पूर्व जन्म की मलीनता, पाप नष्ट हो जाते हैं.. ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी,,,
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है.., जिसके अधिपति स्वयं नारायण विष्णु जी है. ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी
देवास। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय कालानी बाग सेंटर में ध्यान योग व अमृतवाणी का आयोजन किया गया। इस दौरान ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी ने अपनी अमृतवाणी में अधिक मास व पुरुषोत्तम मास की व्याख्या करते हुए कहा किअधिक मास 3 साल में एक बार आता है। हमारी भारतीय संस्कृति के पंचांग सूर्य और चंद्रमा की गति पर बनते हैं। सूर्य की गति तेज होती है, तो चंद्रमा की गति थोड़ी धीमी होती है। सूर्य की गति के अनुसार 12 मास में 365 दिन होते। व चंद्रमा की गति में 354 दिन होते हैं। जिससे 11 दिन का अंतराल आ जाता है और यही 11 दिन का अंतराल 3 साल में मिलकर एक माह जितनी अवधि हो जाती है। दीदी ने आगे कहा कि अधिक मास पुरुषोत्तम मास के रूप में भी मनाया जाता है। क्योंकि इस मास के आधिपति पुरुषोत्तम स्वामी नारायण, पुरुषोत्तम श्री कृष्णा अर्थात आधिपति स्वयं नारायण विष्णु जी हैं। सृष्टि चक्र 5000 साल का होता है। जिसके अंदर सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग कलयुग ये चार युग आते हैं। और जब कलयुग का परिवर्तन होकर सतयुग आने का मध्यकाल होता है, इस मध्यकाल को ही गुप्त युग, अधिक युग व संगम युग कहा जाता है। जहां पर सृष्टि परिवर्तन के साथ ही सर्वशक्तिमान परमात्मा का दिव्य अवतरण होता है। परमात्मा की असीम कृपा मनुष्य मात्र पर बरसती हैं। जहां परमात्मा हमें मानव से पुरुषोत्तम देव तुल्य बनाते हैं। जो भी इस माह में आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं जीवन में एक चमत्कारीक अनुभव पाते हैं। भक्ति जप, तप करते हैं जिसके पुण्य इतने अधिक फलित होते हैं कि पूर्व जन्म की मालीनता, पाप समाप्त हो जाते है। मनुष्य इस मास के नियम, मर्यादा, जप, तप, भक्ति, व्रत विधि विधान को जान ले तो मनुष्य अपने जीवन में सुख पाता है। सद्गति को पाता है। उसके जीवन में सुख समृद्धि के भंडार भर जाते हैं।

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