देवास। श्री दत्त उपासक मंडळ के सामूहिक गुरू चरित्र सप्ताह में पुणे के हरिभक्त परायण हर्षद बुवा जोगळेकर का गुरू चरित्र में भक्ती विषय पर कीर्तन/प्रवचन हुआ। भक्ति के प्रकार बताते हुए बुवा ने बताया कि भक्ति तीन प्रकार की होती है-सह्य भक्ति, सुसह्यभक्ति और असह्य भक्ति। भक्ति करने पर क्या मिलेगा ?यह प्रश्न भक्ति करने के पहले ही व्यक्ति के मन में उत्पन्न होता है। मनुष्य अपेक्षा से ग्रस्त है। ये करूंगा तो क्या मिलेगा ? फलां देवी या देवता की पूजा करूंगा तो क्या मिलेगा ? दरअसल अपेक्षा करना ही व्यर्थ है। व्यक्ति अपने जीवन में पांच बातें चाहिए है वे हैं - सुख ,शांति, समाधान, आनंद और तृप्ति। और कुछ बातें वह बिलकुल नहीं चाहता जैसे दुःख , चिंता, उद्वेग ,भय और व्याधि। लेकिन व्यक्ति के चाहने और ना चाहने से कुछ नहीं होता। अपने कर्मों के भोग इसी जन्म में उसे भोगना पड़ते हैं। अधिक मास का जन्म क्यों हुआ?एक उदाहरण से बताया कि हिरण्य कश्यप ने ईश्वर से वरदान पा लिया था कि वह विधि निर्मित समय (यानी बारह मास) में नहीं मरेगा सो भगवान ने हिरण्य कश्यप का वध करने के लिए यह अतिरिक्त मास बनाया। इस महीने में दान का अति महत्व है। अतिरिक्त महीने में अतिरिक्त प्राप्ति का दान करना चाहिए। दूसरों को शुभेच्छा देने की आदत डालें। सच्चिदानंद स्वरूप पर मनुष्य के मन का टिके रहने की अवस्था अनुसंधान कहलाती है। मैं और परमात्मा भिन्न नहीं है यह परमार्थ की सर्वाेच्च अवस्था होती है। एक अन्य प्रसंग में आपने बताया कि संत तुकाराम ने अपने जीवन में केवल देहू से पंढरपुर तक प्रवास किया, लेकिन उनके रचित अभंग पूर्ण संसार में पढ़े और गाए जाते हैं। जोगळेकर बुवा ने कीर्तन में भगवत गीता, संत श्री नाना महाराज, समर्थ स्वामी रामदास,श्री गजानन महाराज (शेगाव) आदि के प्रसंग सुनाए।संगीत और अध्यात्म का गंभीर ज्ञान रखने वाले श्री हर्षद बुवा की कीर्तन शैली हास्य मिश्रित थी ,जिससे श्रोता बड़े प्रभावित रहे। हारमोनियम पर प्रमोद बोरगांवकर ,तबले पर पराग शर्मा और अशोक देशमुख ने झांज पर संगत की। बुवा का स्वागत दत्ता कुलकर्णी महाराज (बांगर) ने किया। संचालन दीपक कर्पे ने किया।

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