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माता पिता इस लोक की तो परमात्मा परलोक की भी चिंता करते हैं - सुद्रीक पाटिल

माता पिता इस लोक की तो परमात्मा परलोक की भी चिंता करते हैं - सुद्रीक पाटिल

देवास। श्री दत्त उपासक मंडल द्वारा सामूहिक गुरु चरित्र वाचन सप्ताह के दूसरे एवं तीसरे दिन , मुळेवाडी जिला अहिल्यानगर, महाराष्ट्र की श्री दत्त योगीराज बहुउद्देशीय सामाजिक संस्था की ज्ञान तृप्ती सुद्रीक पाटिल तथा अगले दिवस उनके पिता और संस्था के अध्यक्ष हरिभक्त परायण रामायणाचार्य रवींद्रनाथ सुद्रीक पाटील का कीर्तन हुआ। कीर्तन पूर्व संस्था उपाध्यक्ष तुळशीराम अण्णा सोले ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था गौशाला तथा अनाथ बच्चों का पालन पोषण करती है। वर्तमान समय में गौशाला में 800 से अधिक गौधन है। अनाथ बच्चों को संस्था में वारकरी शिक्षण प्रदान किया जाता है। फिलहाल 220 बच्चे हैं जिनमें से 70 बच्चे कीर्तन करते हैं। अनाथ बच्चों को एकेडमिक शिक्षा, कीर्तन प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी के साथ योग्य समय बच्चियों के विवाह भी किए जाते हैं। संस्था के अध्यक्ष हरिभक्त पारायण रामायणाचार्य रवींद्रनाथ सुद्रीक पाटील ने कीर्तन में बताया कि जिस प्रकार वातावरण में बहने वाली हवा, फूलों की सुगंध एवं शक्कर की मिठास दिखती नहीं है, लेकिन अनुभव की जा सकती है उसी तरह ईश्वर का अस्तित्व भी है, लेकिन दिखाई नहीं देता केवल महसूस किया जा सकता है। माता पिता तो अपने बच्चों की इसी लोक के लिए चिंता करते हैं लेकिन परमात्मा अपने बच्चों के परलोक की भी चिंता। कीर्तन में ही आपने संत तुकाराम,संत नामदेव, स्वामी रामकृष्ण परमहंस ई.संतों के प्रसंग सुनाए। उपस्थित श्रोताओं ने गौशाला हेतु रु.51000/- की राशि  एकत्र कर प्रदान की। अनिल बेलापुरकर गुरुजी ने सभी कीर्तन मंडली को वस्त्र,सदस्य भूषण अत्रे ,सदाशिव जोशी ने संस्था के बच्चों के लिए नए कपड़े और मनोहर फड़नीस ने 1000 कॉपियां (स्टेशनरी) भेंट की। कीर्तनकार पिता पुत्री का सत्कार सुधीर निंबालकर और सुजाता चिंचोलीकर ने किया।   आभार प्रदर्शन दीपक कर्पे ने किया।

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