पवित्रता वह शक्ति है जो जीवन को दिव्य और खुशहाल बना देती है... ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी
देवास। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय कालानी बाग सेंटर में नित्य अमृतवाणी के दौरान जिले की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी ने अपनी अमृतवाणी में कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ ज्ञान के अनुसार पवित्रता केवल शरीर की नहीं, बल्कि सच्ची पवित्रता मन, वचन और कर्म की होती है। कई लोग तन से बहुत अच्छा दिखाई देते हैं, लेकिन मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष,क्रोध,,नफ़रत या अहंकार रखते है, या बुरे संकल्प रखते है। तो ऐसी स्थिति में बाहरी अच्छाई अधूरी रह जाती है। सच्ची पवित्रता तब शुरू होती है जब अपने हर विचार को साफ और शुभ बनाना शुरू करते हैं। जब मन में किसी के लिए शुभ भावना हो, वाणी से मधुर शब्द निकले और कर्मों से सबको सुख मिले तभी आत्मा वास्तव में पवित्र बनती है।हम आत्मा हैं और परमात्मा शिव पवित्रता के सागर हैं। जब हम योग के द्वारा उनके उनसे जुड़ते हैं तो धीरे-धीरे मन की अशुद्धियां समाप्त होने लगती है। क्रोध की जगह शांति, नफरत की जगह प्रेम और अशांति की जगह संतोष आ जाता है। आगे कहा कि पवित्रता कोई बंधन नहीं है, बल्कि वह शक्ति है जो जीवन को खुशहाल और दिव्य बना देती है। जब मन पवित्रता होता है। मन में पवित्रता आती है तो जीवन में शांति, रिश्तो में प्रेम और भाग्य में सफलता अपने आप आने लगती है। पवित्रता शरीर से नहीं विचारों से शुद्ध होती है। इसलिए अपने विचारों को श्रेष्ठ और पवित्र रखिए। दीदी ने आगे कहा कि कैसे भी मुश्किलें आ जाए लेकिन आत्मा का संस्कार हिलना नहीं चाहिए। आपके जीवन में ज़ब संकट की घड़ी आती है, तो परमात्मा स्वयं छत्रछाँया बनकर आते हैं। हम घर में मिट्टी का दिया जलाते हैं अगर वह बुझ भी जाए तो कोई बात नहीं। लेकिन परिवार में प्रेम, शांति, सम्मान, खुशी का दिया नहीं पूछना चाहिए। प्रेम शांति, सम्मान, खुशी का जब परिवार में दिया बुझाता है तब घर में आशुभ होता है घर परिवार मे अशांति होती है। इसलिए प्रत्येक आत्मा अपने घर परिवार में प्रेम, शांति, सम्मानऔर खुशी का दिया जलाएं।

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