धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत के साथ निकली दिण्डी यात्रा, 120 साल पुरानी परंपरा का राज परिवार ने किया निर्वहन,,
जन्माष्टमी पर राजबाड़े से निकली भव्य दिंडी यात्रा, कृष्णमय हुआ देवास
भजन-कीर्तन, गरबा और पारंपरिक वेशभूषा ने बांधा समां;
देवास। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर शनिवार देर शाम देवास के सीनियर राजबाड़े से रियासतकालीन दिण्डी यात्रा निकाली गई। धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत के साथ पिछले 120 वर्ष से इस दिण्डी यात्रा को देवास राज परिवार द्वारा निकाला जा रहा है। महान संत तुकाराम जी महाराज की प्रेरणा से तत्कालीन महाराज स्व. तुकोजीराव पवार तृतीय द्वारा शुरु की गई यह दिण्डी यात्रा आज देवास शहर की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान बन गई है। इसी के चलते दिण्डी यात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आज देवास शहर की सड़कों पर नजर आए। सर्वप्रथम सीनियर राजबाड़ा स्थित प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद 120 वर्ष पुरानी पालकी में भगवान लड्डू गोपालजी को विराजित किया गया। यात्रा की अगुवाई देवास विधायक गायत्रीराजे पवार के पुत्र एवं देवास रियासत के महाराज विक्रमसिंह पवार ने की। इस दौरान विक्रमसिंह पवार ने राजबाड़े परिसर में बंधी माखन की मटकी को प्राचीन भाले से फोड़ा गया। तत्पश्चात दिण्डी यात्रा राजवाड़ा से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए देर रात मीठा तालाब पहुंची। यात्रा के दौरान पूरा शहर भगवान श्रीकृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। मार्ग में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारी संगठनों के साथ नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। वहीं यात्रा में शामिल भजन मंडलियों ने संकीर्तन और भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं तथा राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में निकाली जाने वाली यह दिण्डी यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है।

0 Comments