दूरदर्शी सोच के साथ लक्ष्य तय करें, सफलता के लिए निरंतर मेहनत करें : सुरेशसिंह भदौरिया,,
एमिटी यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विजीगिशु-2026 में अमलतास एवं मालवांचल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन ने छात्रों से किया संवाद
इंदौर। आज के दौर में छात्रों के लिए केवल अपने विषय का ज्ञान हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक बदलावों की भी समझ विकसित करनी चाहिए। विद्यार्थियों को दूरदर्शी सोच के साथ अपने लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर उत्कृष्टता के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने यह बात अमलतास एवं मालवांचल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन सुरेशसिंह भदौरिया ने एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘विजीगिशु-2026’ में छात्रों को संबोधित करते हुए कही।एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एआईआईएस), एमिटी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश, नोएडा कैंपस, इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) और रूस की एमजीआईएमओ यूनिवर्सिटी के सहयोग से सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन के सातवें संस्करण का विषय ‘दक्षिण पूर्व एशिया और वैश्विक दक्षिण : बहुध्रुवीय दुनिया में उभरती सुरक्षा, स्थिरता और रणनीतिक गतिशीलता’ रखा गया है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के राजनयिकों, शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने वैश्विक परिस्थितियों पर विचार साझा किए।
*विकासशील देशों को अपनी साझा चिंताओं और आकांक्षाओं का एक मंच*
जर्मनी, इंडोनेशिया, इथियोपिया, आसियान और अफ्रीकी संघ में भारत के पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह ने कहा कि भारत आसियान और वैश्विक दक्षिण के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है। ब्रिक्स की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यह वैश्विक दक्षिण के लिए एक माध्यम के रूप में उभरा, जिसने विकासशील देशों को अपनी साझा चिंताओं और आकांक्षाओं को व्यक्त करने के लिए एक मंच प्रदान किया। रूस के एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय के शासन और राजनीति संकाय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुज़ाना एडम्यंट्स ने कहा कि भारत और रूस के बीच सौहार्दपूर्ण और मजबूत संबंध हैं। विश्व एक परिवार है, और हमें शांति और सद्भाव से मिलकर रहना चाहिए। उत्तर प्रदेश स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) बलविंदर शुक्ला ने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय ऐसे मंच तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो छात्रों को समकालीन वैश्विक घटनाक्रमों से जुड़ने और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की गहरी समझ हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करें। आईसीडब्ल्यूए के विदेश और सुरक्षा नीति विश्लेषक डॉ. श्रीपति नारायणन ने कहा कि यह सम्मेलन एमिटी द्वारा ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब भारत ने हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने में वैश्विक दक्षिण की उभरती भूमिका पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित हुआ है। एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की निदेशक एवं प्रमुख, प्रोफेसर (डॉ.) नागलक्ष्मी एम. रमन ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य विद्वानों, नीति निर्माताओं, राजनयिकों, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों को एक साथ लाकर सार्थक संवाद स्थापित करने के माध्यम से इन उभरते रुझानों का गहन विश्लेषण करना है। इस अवसर पर एक सम्मेलन सारांश पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।

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