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ऑनलाइन कुछ ख़रीदना हो तो 48 घंटे रुकिए, ज़रूरत सच्ची होगी तो इच्छा बनी रहेगी – डॉ. नीलम टंडन'उल्लास – एक अभिनव प्रयोग' के तहत जिला न्यायालय देवास में वित्तीय साक्षरता पर व्याख्यान

ऑनलाइन कुछ ख़रीदना हो तो 48 घंटे रुकिए, ज़रूरत सच्ची होगी तो इच्छा बनी रहेगी – डॉ. नीलम टंडन

'उल्लास – एक अभिनव प्रयोग' के तहत जिला न्यायालय देवास में वित्तीय साक्षरता पर व्याख्यान
देवास 23 सितंबर। "आज एक क्लिक पर ख़रीदारी हो जाती है, इसलिए पैसा भी उतनी ही आसानी से निकल जाता है। किसी भी गैर-ज़रूरी चीज़ को ख़रीदने से पहले 48 घंटे रुक जाइए। अगर ज़रूरत सच्ची है तो इच्छा बनी रहेगी, वरना अपने आप ख़त्म हो जाएगी।" यह बात वेल बीइंग शिक्षा फाउंडेशन, नई दिल्ली की संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. नीलम टंडन ने शनिवार को "वित्तीय साक्षरता एवं कल्याण" विषय पर अपने व्याख्यान में कही।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की पहल 'उल्लास – एक अभिनव प्रयोग' के अंतर्गत यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुआ। जिला मुख्यालय देवास के साथ सोनकच्छ, टोंकखुर्द, बागली, कन्नौद और खातेगांव के तहसील न्यायालय भी इससे जुड़े। जिले के सभी न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता वर्चुअल रूप से शामिल हुए।
डॉ. टंडन ने सरल उदाहरणों से समझाया कि बचत की शुरुआत आय से नहीं, ख़र्च की समझ से होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि पहले 30 दिन तक हर ख़र्च लिखें, फिर 50-30-20 जैसा बजट बनाएँ। 3 से 6 महीने के ज़रूरी ख़र्च जितनी आपात निधि अलग रखें और क्रेडिट कार्ड जैसे महँगे कर्ज़ सबसे पहले चुकाएँ। उनका कहना था कि वेतन बढ़े तो जीवनशैली से पहले बचत बढ़नी चाहिए। रोज़ सिर्फ़ ₹50 बचाकर लंबे समय तक नियमित निवेश करने पर चक्रवृद्धि का असर कितना बड़ा हो सकता है, यह भी उन्होंने आँकड़ों से दिखाया। बीमा सुरक्षा के लिए है और निवेश संपत्ति बनाने के लिए, इसलिए दोनों को मिलाकर न देखें। हर साल अपनी वित्तीय स्थिति, नॉमिनी और वसीयत की समीक्षा करने तथा सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय की योजना बनाने की सलाह भी उन्होंने दी। ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए उन्होंने सेबी, एम्फी, आरबीआई रिटेल डायरेक्ट और साइबर क्राइम पोर्टल जैसे आधिकारिक स्रोतों की जानकारी भी दी।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री कपिल मेहता ने बताया कि 'उल्लास' माननीय न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक की परिकल्पना है। वर्ष 2024 में ग्वालियर खंडपीठ से शुरू हुई यह पहल अब माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों में लागू की गई है, ताकि न्यायिक परिवार काम के तनाव से उबरकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो सके। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया। माननीय न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक भी कुछ समय के लिए कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े।

नवनियुक्त न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने बचत, निवेश और पेंशन को लेकर खुलकर सवाल पूछे, जिनका डॉ. टंडन ने विस्तार से उत्तर दिया। अंत में जिला अभिभाषक संघ, देवास के अध्यक्ष श्री राम प्रसाद सूर्यवंशी ने इस अनूठे आयोजन के लिए देवास को चुनने पर माननीय उच्च न्यायालय का आभार माना। उन्होंने कहा कि यह पहल नए ही नहीं, वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए भी उतनी ही उपयोगी  साबित होगी

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