गणेशोत्सव की शाम महिलाओं के नाम, मंच पर सजी नारी शक्ति की कहानी,,
ऊंच माझा झोका में महान महिलाओं का किरदार, मंगळागौर ची गाणी में गूंजी मराठी संस्कृति की धुन
देवास। महाराष्ट्र समाज के 81वें गणेशोत्सव के नौवें दिन महिलाओं के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाराष्ट्र समाज के प्रवक्ता अमित बागलीकर ने बताया कि समाज की महिलाओं ने पारंपरिक महाराष्ट्रीयन वेशभूषा में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर गणेशोत्सव की शाम को यादगार बनाया। कार्यक्रम में महिलाओं ने अभिनय, गीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में ‘ऊंच माझा झोका’ की प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रही। इसमें संत मुक्ताई की भूमिका पल्लवी जोशी, जिजामाता की दिव्या गोटी, अहिल्याबाई की शिल्पा दीवान, रानी लक्ष्मीबाई की उज्ज्वला व्यास, रमाबाई रानडे की शिखा धोडपकर, सावित्रीबाई फुले की स्मिता म्हाडगुत, सिंधूताई सपकाल की मेघा गुणे, बहिणाबाई चौधरी की कविता डिंडुलकर, डॉ. आनंदीबाई जोशी की विनीता सरवटे, सुधा मूर्ति की शिल्पा कोचरेकर, लता मंगेशकर की सुनीता डगांवकर, आशा भोसले की मेघा बिडवई, वीणा पाटिल की सौम्या लोन्ढे, शूटर अंजली भागवत की प्रेरणा दीवान, जयंती कठाले की लता सुपेकर, सुमित्रा महाजन की वृषाली आपटे और माधुरी दीक्षित की आरती कुलकर्णी ने भूमिकाएं निभाईं। महिलाओं ने इन प्रसिद्ध महिलाओं के जीवन और योगदान को अभिनय के माध्यम से मंच पर प्रस्तुत किया। बाल कलाकार जाग्रव जोशी ने बाल शिवाजी और किमया कुलकर्णी ने तुलजा भवानी की भूमिका निभाई। गणेश खोरकर और स्वरा दीवान ने भी बाल कलाकारों के रूप में प्रस्तुति दी। समाज की महिलाओं ने धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय सहभागिता का संदेश दिया। गृहस्थी की जिम्मेदारियों के साथ समाज के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है। कार्यक्रम का संचालन ऋचा कर्पे और वृषाली आपटे ने किया, जबकि लेखन ऋचा कर्पे का रहा। इसके बाद ‘मंगळागौर ची गाणी’ कार्यक्रम में रुषाली विपट सहित 16 महिला सदस्यों ने गणेश वंदना, जोगवा और देवी का गोंधळ प्रस्तुत किया। पारंपरिक गीत-संगीत और प्रस्तुतियों के माध्यम से महाराष्ट्र की लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम एवं पूर्णिमा गौतम रहे। दीप प्रज्वलन के साथ अतिथियों का स्वागत प्रेरणा जांभेकर, रुषाली विपट, प्रकाश कोर्डे और उल्लास गुणे ने किया। महिलाओं की प्रस्तुतियों को समाजजनों ने सराहा और तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। गणेशोत्सव के नौवें दिन आयोजित यह कार्यक्रम महिलाओं की प्रतिभा और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित रहा।

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