शिक्षक दिवस पर काली पट्टी बांधकर शिक्षकों का प्रदर्शन, ई-अटेंडेंस और टीईटी की अनिवार्यता का जताया विरोध
देवास। शिक्षक समाज राष्ट्र निर्माण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही ई-अटेंडेंस व्यवस्था तथा लंबे समय से शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा की पुनः अनिवार्यता के प्रस्ताव को लेकर शिक्षकों में नाराजगी दिखाई दी। शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार, 5 सितंबर को संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शासकीय शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विद्यालयों में कार्य करने के बाद विरोध प्रदर्शन किया। मोर्चा प्रवक्ता अरुण मिश्रा ने बताया कि प्रदर्शन के लिए शिक्षक एबी रोड स्थित मंडूक पुष्कर धरना स्थल पर एकत्रित हुए। यहां शिक्षकों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। पुरुषोत्तम सिसोदिया ने कहा कि विद्यालय में शिक्षक की उपस्थिति का निर्धारण केवल तकनीकी माध्यम से नहीं, बल्कि विद्यालयीन व्यवस्था एवं शिक्षक की वास्तविक उपस्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं, ऐसे में उन पर टीईटी परीक्षा की पुनः अनिवार्यता लागू करने के निर्णय पर शासन को पुनर्विचार करना चाहिए। शिक्षकों ने कहा कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की समीक्षा की जाए तथा कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी की पुनः अनिवार्यता का निर्णय वापस लिया जाए। प्रदर्शन में साबिर शेख, अरुण मिश्रा, जितेंद्र मालवीय, धर्मबीर नरवरिया, डॉ. रजनीश पोरवाल, अर्जुन सिंह बैंस, कमल सिंह चंद्रवंशी, राजेंद्र सूर्यवंशी, दिनेश निगम, हंसा चौधरी, लक्ष्मी माली, राजकुमारी सोलंकी, नीला रायकवार, सीमा चौधरी, निर्मला कटारिया, रागनी त्यागी, डिम्पल यादव, रश्मि अवस्थी, संगीता त्रिवेदी, सुनीता ढालसे, ज्योति निगम सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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