प्रभु ने पीड़ा को स्वीकारा, पर पीड़ा देने वाले को नहीं धिक्कारा: भाग्यवंत भाई
देवास। पर्यूषण महापर्व पर श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में प्रवचन माला को संबोधित करते हुए वीर सैनिक भाग्यवंत भाई, मेहुल भाई, धर्मेश भाई एवं भव्य भाई ने कहा कि तीर्थंकर स्वयं की सहायता से कर्मों की निर्जरा करते हैं। परमात्मा के जीवन में भी घोर कष्ट आए, लेकिन वे समभाव से सहते रहे। प्रभु ने पीड़ा को स्वीकारा, लेकिन पीड़ा देने वाले को कभी नहीं धिक्कारा।
उन्होंने कहा कि हमें बड़ा नहीं, महान बनना चाहिए। बड़ा व्यक्ति लोगों की जीभ पर रहता है, जबकि महान व्यक्ति हृदय में प्रतिष्ठित होता है। प्रवचन में ऋषभदेव से लेकर महावीर स्वामी तक 24 तीर्थंकरों के जीवन चरित्र का सार प्रस्तुत किया गया।
प्रवक्ता विजय जैन ने बताया कि रविवार दोपहर पार्श्वनाथ पंचकल्याणक पूजन दिलीप कुमार पुखराज दोषी द्वारा संपन्न हुआ। प्रभु की अंगरचना महावीर जैन, प्रफुल्ल जैन, अंकित जैन, लवेश तरवेचा, तनिष्क कटारिया ने बनाई। रात्रि में मातृ-पितृ एवं पारिवारिक वंदना का भावपूर्ण कार्यक्रम हुआ।
15 सितंबर मंगलवार को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा, जिसमें बारसा सूत्र वाचन, चैत्य परिपाटी, महाप्रतिक्रमण एवं क्षमापना का अनुष्ठान होगा।

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