प्रकृष्ट साधना- तपस्या- समता के दिव्यपुंज थे भगवान महावीर.. भाग्यवंत भाई,,
अर्हं को पाने के लिए अहं त्यागना होगा
देवास: श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर तुकोगंज रोड पर पर्युषण महापर्व के छठे दिवस विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए वीर सैनिक भाग्यवंत भाई, मेहुल भाई, धर्मेश भाई एवं भव्य भाई ने कहा कि भगवान महावीर ने सिर्फ उपदेश नहीं दिए, बल्कि स्वजीवन में उनका पालन किया। उन्होंने कहा कि जीवन में अहं होगा तो अर्हं यानी प्रभु की प्राप्ति नहीं होगी।
प्रवक्ताओं ने कहा कि प्रभु महावीर के जीवन में प्रकृष्ट साधना, प्रकृष्ट तप तथा प्रकृष्ट समता के दर्शन होते हैं। संपन्न परिवार और विशाल साम्राज्य का त्याग कर उन्होंने साढ़े 12 वर्ष तक कठोर साधना की, जिसमें केवल 349 दिन ही एक बार भोजन लिया। उन्होंने 6 माह के उपवास दो बार, 4 माह के 9 बार, 1 माह के 12 बार सहित कठोर तप किया।
धर्मसभा में पलनाजी की भक्ति भावना के अवसर पर विधायक गायत्री राजे पवार, महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल, सभापति रवि जैन, पूर्व महापौर रेखा वर्मा, कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम आदि उपस्थित थे। बच्चों को ज्ञान उपकरण वितरित किए गए। श्री नवपदजी पूजन संस्था जय जिनेन्द्र द्वारा की गई। रात्रि में एक शाम प्रभु पार्श्वनाथ के नाम भक्ति कार्यक्रम हुआ।
आगामी कार्यक्रम के अंतर्गत 14 सितंबर को दोपहर 2 बजे श्री पार्श्वनाथ पंचकल्याणक पूजन दिलीप कुमार पुखराज दोषी द्वारा होगा तथा 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा।

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